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Wednesday, September 19, 2012

Maa Bharti - माँ भारती

माँ भारती तू जब बुलाएगी, हम तेरे पास चले आएँगे
सांस रहेगी जब तक सांस मे, वन्दे मातरम गाएँगे

ख्वाहिश मन मे बस चली है, पूर्ण स्वराज भी पाएँगे
इन बेईमानी के पुतलो से, अपना वतन बचाएंगे

नहीं मानेंगे वो अगर तो, लाठी डंडा खाएँगे
तेरी खातिर ए वतन, हम जेल तलक भी जाएँगे

वक़्त आने दे ओ आसमाँ, तुझको भी बतलाएँगे
आज़ादी की आतिशी से, आसमाँ चमकाएंगे

जो भी है वो तेरा ही है, तुझको ही दे जाएँगे
दिल तो दे चुके हैं तुझको, अब ये जाँ भी लुटाएँगे

भगत सिंघ के सपने सच हो, ऐसा देश बनाएँगे
आसमाँ मे सबसे उँचा, अपना तिरंगा फेहराएँगे,

शहीदो की मज़ारो पर, हम दिए जलाएँगे
फक्र उनको भी हो हम पर, ऐसा कर दिखलाएँगे

माँ भारती तू जब बुलाएगी, हम तेरे पास चले आएँगे
सांस रहेगी जब तक सांस मे, वन्दे मातरम गाएँगे

An open letter to CAG of India - भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक विनोद राय जी के नाम हमारा खुला पत्र

भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक विनोद राय जी के नाम हमारा खुला पत्र:

प्रिय विनोद राय जी,
सप्रेम नमस्कार,
इस पत्र को लिखने के पीछे मेरा उद्देश्य आपको बधाई देना तथा आभार प्रकट करना है कि आपने हमारे देश का जो अनमोल ख़ज़ाना हमारे प्रधान मंत्री
 की वजह से लुट गया है, उसकी जानकारी आपने हम सभी देशवासीओ को देकर हमे ये सोचने पर मजबूर किया कि क्या हमे कुछ करने की ज़रूरत है या नही.
सनदी लेखाकार व्यवसाय से जुड़ा होने के नाते मेरी ज़िम्मेदारियाँ अपने देश की तरफ बढ़ जाती है, और जिस तरह से आपने अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाई है, सत्यमेव जयते का नारा बुलंद करते हुए, मैं उम्मीद करता हूँ के जैसे ही मैं सनदी लेखाकार बन जाऊँगा, मैं भी आपके दिखाए इस मार्ग पर चल सकूँगा.
तब तक के लिए हमारे व्यवसाय से जुड़े सभी भाइयों और बहनो की तरफ से आप हमारा प्रणाम कबूल कीजिए.
जय हिन्दुस्तान

आपका आभारी
निपुण सिकरी

Awaaz Uthao - आवाज़ उठाओ

ऑडियो के लिए: आवाज़ उठाओ गीत - MP3
वीडियो के लिए: आवाज़ उठाओ गीत - Video

आवाज़ उठाओ - बोल

बेबस हो, बेकस हो, मजबूर हो क्यूँ
आवाज़ उठाओ
आवाज़ उठाओ, आवाज़ उठाओ
आवाज़ से आवाज़ मिलाओ
आवाज़ उठाओ, आवाज़ उठाओ
जण, गण, मण, जनतंत्र अधिनायक हो तुम,
आवाज़ उठाओ
आवाज़ उठाओ
आवाज़ से आवाज़ मिलाओ
आवाज़ उठाओ, आवाज़ उठाओ

जिस देश मे हज़ारो बच्चे भूख से तड़प-तड़प कर मर जाते है
वहाँ लाखों-लाख टन अनाज सड़ जाते है
ऐसी सरकार को क्या कहा जाए

भूखे बिलखते तड़पते है बच्चे
नंगे फटेहाल भटके ये बच्चे
भूखे बिलखते तड़पते है बच्चे
नंगे फटेहाल भटके ये बच्चे
कूड़ो मे कुछ पा मचलते है बच्चे
अनाज गोदमो मे सड़ते ही रहते
अनाज गोदमो मे सड़ते ही रहते
बेबस हो बेकस हो मजबूर हो क्यूँ
आवाज़ उठाओ
आवाज़ उठाओ, आवाज़ उठाओ
जण, गण, मण, जनतंत्र अधिनायक हो तुम,
आवाज़ उठाओ
आवाज़ उठाओ, आवाज़ उठाओ

जिस देश मे दवाओ की कमी से लाखों-लाख लोग मर जाते है
वहाँ खरबो के हथियार खरीदे जाते है
आख़िर क्यों

बीमारो को तो दवा नही मिलती
मरते हुओ को पानी नही है
बीमारो को तो दवा नही मिलती
मरते हुओ को पानी नही है
बोतल मे बिकती है लाखों की प्यासे
खरबो के हथियार खरीदे है जाते
खरबो के हथियार खरीदे है जाते
बेबस हो बेकस हो मजबूर हो क्यूँ
आवाज़ उठाओ
आवाज़ उठाओ, आवाज़ उठाओ
जण, गण, मण, जनतंत्र अधिनायक हो तुम,
आवाज़ उठाओ
आवाज़ उठाओ, आवाज़ उठाओ

महंगाई के नाते आज आम आदमी की थाली से एक-एक करके सारी चीज़े गायब होती जा रही है
फिर भी सरकार महंगाई बढ़ाने की मजबूरी का बार बार रोना रोती है
आख़िर क्यों

तेरे गले पे छुरी रखी है
तेरी ही मेहनत पे डाका पड़ा है
तेरे गले पे छुरी रखी है
तेरी ही मेहनत पे डाका पड़ा है
तेरी ही थाली तो लूटी गयी है
फिर भी तू रो रो के सहता रहा है
फिर भी तू रो रो के सहता रहा है
बेबस हो बेकस हो मजबूर हो क्यूँ
आवाज़ उठाओ
आवाज़ उठाओ, आवाज़ उठाओ
जण, गण, मण, जनतंत्र अधिनायक हो तुम,
आवाज़ उठाओ
आवाज़ उठाओ, आवाज़ उठाओ


मुझे नही पता ये किसने लिखा गाया है.
जो भी क्रेडिट लेना चाहे वो मुझे इस पर ई-मेल कर सकता है: aamjankalyan@gmail.com

Retail in Foreign Direct Investment (FDI) -भारत को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की ज़रूरत

भारत को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफ.डी.आइ.) की ज़रूरत

बात को ध्यान से पढ़ना और समझ आया तो औरो को भी पढ़ाना.
जब हिलेरी क्लिंटन भारत आई और बंगाल पहुँच के दीदी को समझा रही थी की रीटेल मे एफ.डी.आइ. भारत की ज़रूरत है. तो मुझे लगता है के दीदी को सोच समझ के उसी वक़्त ये जवाब देना था के भारत को एफ.डी.आइ. की नही एफ.डी.आइ. को भारत की ज़रूरत है.
नही तो हमारे लोगों के पास पैसे की कमी है क्या?
अगर हमारी सरकार बाहर के लोगो के आगे हाथ जोड़ सकती है तो क्या वो अपने लोगो से सिर्फ़ दरख़्वास्त भी नही कर सकती.
मगर ये सियासतदार लोग जानते है के हमारे उद्योगपतिओ का पैसा देश के हित के लिए नही है.
वो तो इनके चुनावी अभियानो के लिए सुरक्षित है.
बड़े बड़े उद्योगपतिओ को डरा धमका कर उनसे पैसा ले लिया जाता है ताकि वो चाह कर भी देश हित मे कुछ ना कर सके.
और एक बात कह दूँ जो आप सब लोग जानते भी है, "भारत ग़रीब देश है लेकिन भारतीय ग़रीब नही है".
दुनिया मे १९६ देश है. उन १९६ देशो मे से जब १०० सबसे अमीर लोगो को चुना जाता है तो 5 भारतीयों का भी नाम आता है.
तो अब आप समझ ही जाइए कि भारत ग़रीब देश है लेकिन भारतीय ग़रीब नही है.
और जिस दिन इस भारतीय की मानसिकता 'मैं' से "हम" पर आ गयी उस दिन देखना होगा के कौन सा पाकिस्तान हम पर आतंकी हमले करवा पाता है, कौन सा अमेरिका हम पर दबाव बना पाता है और कौन सा चीन हम से आगे निकल पाता है.
और अब देखना ये होगा के कौन कौन सा बंदा यहाँ पे इतना समझदार है की इस बात को सब तक पहुँचा पाता है.
जय इंसान
जय हिन्दुस्तान!!

Friday, September 14, 2012

Kya aap shakahari hai-क्या आप शाकाहारी है

आज एक सवाल पूछने को दिल चाह रहा है
क्या आप शाकाहारी है- या आप सिर्फ़ समझते है कि आप शाकाहारी है, क्यूंकी इस लिंक पर जाने के बाद शायद आपकी सोच बदल जाए, आपको पता चले की आप ना चाहते हुए भी एक साल मे कितना सारा माँस ग्रहण करते है और वो भी आपकी
 पसंदीदा मिठाई के रूप मे
मैं ये नही कहूँगा की इसे साझा करे और दोस्तों तक पहुँचाए पर हाँ इतना ज़रूर है की सत्य तो सत्य ही रहेगा, चाहे आप चाहे या आप ना चाहे
सत्यमेव जयते
जय भारत

http://www.iskcondesiretree.net/profiles/blogs/indian-sweets-silver-foils


Hindi Diwas Vishesh-हिन्दी दिवस विशेष




हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें
मुझे हिन्दी से प्रेम है और अँग्रेज़ी से नफ़रत है, इसके कई कारण है.
सर्वप्रथम तो यह के अँग्रेज़ी मेरा नाम ही नही लिख सकते.
बचपन से ही मुझे ण को न लिखते आना पड़ रहा है.
बचपन मे जब प्रयायवाची शब्द पड़ते हुए मेरा नाम कुशल के सामने आता था तब ये समझ नही आता था के हिन्दी मे निपुण है तो अँग्रेज़ी मे निपुन क्यूँ.
दूसरा कारण ये (देखा आप कारण भी अँग्रेज़ी मे नहीं लिख बोल सकते) के मैं जब पैदा हुआ और 1-2 साल मे बोलने लगा तो मैने जो पहले शब्द मुख से निकाले वो हिन्दी मे ही थे. तो हिन्दी मेरी मातृभाषा है.









तीसरा कारण ये के ये मेरी अपनी भाषा है, मेरे पिताजी भी यही बोलते है, मेरे दादाजी भी यही बोलते थे.
अच्‍छा एक बताओ, बचपन मे जब कभी लड़ाई होती थी आपके और दूसरे गुट के बीच, तो अपने गुट के दोस्तों का साथ देते थे या दूसरो का.
तो फिर, जब अँग्रेज़ी और हिन्दी के बीच की लड़ाई है तो दूसरो का साथ कैसे दे रहे हो.









अच्छा अब आप कहेंगे साहब इस वैश्वीकरण के दौर मे हम अँग्रेज़ी से मुँह मोड़ लेंगे तो जीवनयापन कैसे होगा.
तो मेरा तर्क ये है के अंग्रज़ी बोलते रहो और हिन्दी से जुड़े रहो.
जब अँग्रेज़ी बोलने वाले लोग अपनी भाषा को विश्व की भाषा बना सकते है तो हम क्यूँ नही.
हम क्यूँ नही मेहनत करते अपनी भाषा को विश्व की भाषा बनाने के लिए.
सभी ने माना है के हिन्दी विश्व की सर्वश्रेष्ठा भाषाओ मे एक है.
क्यूंकी हिन्दी मे आप निपुण लिख सकते है अँग्रेज़ी मे नही.
अच्छा एक और, अँग्रेज़ी मे त है ही नही. अँग्रेज़ी वर्णमाला का कोई वर्ण त से शुरू ही नही होता.
अब ये अपमान हम कैसे सहे.
क्यूंकी हिन्दी बोलने वाले जानते है के हम चाहे गुस्से मे हो चाहे उल्लास मे, हम जब तक तेरी ___ की ___  नही बोलते तब तक हमे सुकून नही मिलता है.

मैं इतनी तरफ़दारी कर रहा हूँ हिन्दी की फिर भी मैने एक अँग्रेज़ी माध्यम के विद्यालय मे 14 साल तक पढ़ाई की.
क्यूंकी मैं जब 1990 मे पैदा हुआ तब उदारीकरण और वैश्वीकरण नयी नयी समस्याएँ आई थी.
तो मेरे पिताजी को लगा के कहीं मेरा लड़का दुनिया की भागदौड़ मे पीछे ना रह जाए इसलिए उन्होने शहर के सबसे बेहतरीन विद्यालय मे मेरा दाखिला करा दिया.
पर कोई बात नही, अगर मैं अँग्रेज़ी ना पढ़ता तो मुझे
पता कैसे चलता के हिन्दी बेहतर है या अँग्रेज़ी.



अब मेरी समझ मे तो आ गयी है, देखते है आप कितना समझ पाते है. तो गुड मॉर्निंग की जगह नमस्ते सुप्रभात बोलिए,
गुड नाइट की जगह शुभ रात्रि, और दिखाइए हिन्दी भाषा को के वो सिर्फ़ एक भाषा नही है, वो हमारी मातृभाषा है.
हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

Thursday, September 13, 2012

Thootiye, Sootiye, Kootiye-थूतिये, सूतिये, कूतिये

आओ मिलके थूतियो, सूतियों और कूतियो को बताए की क्या सही है और क्या ग़लत है
अगर आप इस मुहिम को और आगे बढ़ाना चाहते है तो हमे इस बिजली संदेश पते पर संपर्क करे: aamjankalyan@gmail.com
अगर आपको इसकी वर्ड फाइल चाहिए तो आप इस लिंक पर जा सकते है
https://docs.google.com/document/d/1vrHgM-hvaKEyLObSvxMG4ID7ZWiJuMDuCKTLIF6zs2c/edit

Monday, September 3, 2012

Mannu Badnaam Hua--मन्नू बदनाम हुआ

मुन्नी उर्फ मन्नू जी सन्सन्ग मे शुरू करते है:
मन्नू बदनाम हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
मन्नू बदनाम हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
सोहनेयो के बेटा शराबी, बेंक बेहिसाबी, ना कोई जवाबी रे....
गटर और सीवर हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
अंडरअचीवर हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
सोहनेयो के बेटा शराबी, बेंक बेहिसाबी, ना कोई जवाबी रे....
गटर और सीवर हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
अंडरअचीवर हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
मन्नू बदनाम हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
मन्नू बदनाम हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
करप्ट है फिगर, ज़बान पे ताला, ज़बान पे ताला
कोयले घोटाले मे मुँह है काला रे मुँह है काला
रे तू ना जाने मेरी चुप्पी पे......
रे तू ना जाने मेरी चुप्पी पे अरबो रुपैया मिला
रिमोट वाला रोबोट हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
बिकने वाला वोट हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
मन्नू बदनाम हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
मन्नू बदनाम हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
फिर सारी जनता एक स्वर मे बोलती है:
ओये मन्नू, ओये मन्नू
ओये मन्नू, ओये मन्नू
फिर परम पूजनिय सोनू सूद उर्फ अन्ना जी आते है
ओये मन्नू रे, ओये मन्नू रे
तेरा गली गली मे चर्चा रे
बाँटा कोयला, वो बगैर पर्चा रे
बाँटा कोयला, वो बगैर पर्चा रे
ओये मन्नू रे, ओये मन्नू रे
मुन्नी उर्फ मन्नू जी सन्सन्ग मे फिर से शुरू करते है:
कैसी सरकार से मेरा पाला पड़ा, जी पाला पड़ा
कैसी सरकार से मेरा पाला पड़ा, जी पाला पड़ा
दिग्गी भोंकी जाए, छोटू चुप छाप खड़ा, अन्ना पीछे पड़ा
उ.पी. पंजाब और गोआ भी गया.......
उ.पी. पंजाब और गोआ भी गया, अब तो दिल्ली भी जाएगा
मैं तो हरिद्वार चला, सोहनेयो छोड़ के तुझे
अब हरी के द्वार चला, सोहनेयो छोड़ के तुझे
मन्नू बदनाम हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
मन्नू बदनाम हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
फिर पीछे से सलमान उर्फ सोहनेयो आती है

मुझको छोड़ के तू कहाँ पे चला, कहाँ पे चला
मुझको छोड़ के तू कहाँ पे चला, कहाँ पे चला
तेरे रहते तो मेरा परिवार पला, रे परिवार पला
पेट्रोल पड़ा है और डीसल भी पड़ा......
पेट्रोल पड़ा है और डीसल भी पड़ा अभी तो लूटा सिर्फ़ कोयला....
तूने खूब काम किया, मन्नू जी मेरे लिए
मेरा खूब नाम लिया, मन्नू जी मेरे लिए
मन्नू बदनाम हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
मन्नू बदनाम हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
सोहनेयो के बेटा शराबी, बेंक बेहिसाबी, ना कोई जवाबी रे....
गटर और सीवर हुआ, सोहनेयो तेरे लिए
अंडरअचीवर हुआ, सोहनेयो तेरे लिए

सौजन्य से : गीत 'मुन्नी बदनाम हुई', पिक्चर 'दबंग'

Wednesday, July 18, 2012

Sab Janta hai bhagwan-सब जानता है भगवान


देश पर कुर्बान
होती है जो जान
उसकी कीमत बस 
जानता है भगवान

मरता है वो जब
मानो मिलता है उसे सब
यही तो इक सपना था
जानता है वो रब

होता है वो इंसान दुनिया से जुदा
बचाने देश की इज़्ज़त जो जंग मे कुदा
एक के बाद एक जन्म मे शहीद होंगे 
जानता है ये बस उसका खुदा

Wednesday, July 4, 2012

Hothon par ganga ho,Hathon me tiranga ho-होठों पर गंगा हो,हाथों मे तिरंगा हो



यह कविता एक ऐसी है जो किसी भी दिल मे एक जुनून पैदा कर सकती है
देश पर मरने का जुनून,कुछ कर गुज़रने का जुनून
यह कविता डा. कुमार विश्वास ने आज से कई वर्ष पहले लिखी थी और मैने केवल इसके आख़िर मे कुछ पंक्तियाँ जोड़ी है(जो हरे रंग मे नज़र आती है) जो की पूरी तरह से मेरे देश और मेरे गुरुजी डा. कुमार विश्वास को समर्पित है.




शोहरत ना अता करना मौला,दौलत ना अता करना मौला
बस इतना अता करना चाहे,जन्नत ना अता करना मौला
शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों मे तिरंगा हो

बस एक सदा ही उठे सदा बर्फ़ीली मस्त हवाओं मैं
बस एक दुआ ही उठे सदा जलते तपते सहराओं मैं
जीते जी इसका मान रखे, मारकर मर्यादा याद रहे
हम रहे कभी ना रहे मगर, इसकी सज धज आबाद रहे
गोधरा ना हो, गुजरात ना हो, इंसान ना नंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों मैं तिरंगा हो.

गीता का ज्ञान सुने ना सुने
इस धरती का यश्गान सुने
हम शबद कीर्तन सुन ना सके
भारत माँ का जय गान सुने
परवरदिगार मैं तेरे द्वार
कर लो पुकार ये कहता हूँ
चाहे अज़ान ना सुने कान पर जय जय हिन्दुस्तान सुने
जन मन मे उच्छल देश प्रेम का जलधि तरंगा हो
होठों पर गंगा हो
हाथों मे तिरंगा हो


जीना भी हो मरना भी हो तेरी मिट्टी की खुशबू में
हँसना भी हो रोना भी हो बस तेरे प्यार के जादू में
उस खुदा से हरदम रहे दुआ
तू खुश रहे चाहे मुझे कुछ भी हुआ
तेरी धरती अंबर से प्यारी है
समुंद्र ही लागे तेरा हर इक कुआँ
बहुत सह चुके अब और ना सहे
अब सब कुछ चंगा हो
होठों पर गंगा हो, हाथों मैं तिरंगा हो.

कुछ माँगा नही सब पाया है धरती माँ तेरे आँचल से
सुंदरता और सुरक्षा भी मिली हे भारती तेरे हिमाचल से
एक दूसरे को अब माने भाई 
चाहे हिंदू मुस्लिम हो सिख या ईसाई
एक दूसरे के लिए भी लड़े अब
और आपस मे ना करे लड़ाई
धर्म एक हो इक ही जात हो
और ना कोई दंगा हो
होठों पर गंगा हो
हाथों मे तिरंगा हो